शिमला बाईपास सुरंग परियोजना: उच्च न्यायालय ने एनएचएआई से मांगा जवाब, ₹600 करोड़ के मुआवजे पर उठाए सवाल

हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) से शिमला बाईपास के लिए सतही राजमार्ग की मूल योजना को छोड़कर जुड़वां सुरंगों का व...

शिमला बाईपास सुरंग परियोजना: उच्च न्यायालय ने एनएचएआई से मांगा जवाब, ₹600 करोड़ के मुआवजे पर उठाए सवाल

शिमला बाईपास सुरंग परियोजना: उच्च न्यायालय ने एनएचएआई से मांगा जवाब, ₹600 करोड़ के मुआवजे पर उठाए सवाल

हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) से शिमला बाईपास के लिए सतही राजमार्ग की मूल योजना को छोड़कर जुड़वां सुरंगों का विकल्प चुनने पर विस्तृत जवाब मांगा है। न्यायालय ने इस बात पर भी सवाल उठाए हैं कि जब पहले की परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण और लगभग 600 करोड़ रुपये का मुआवजा वितरित किया जा चुका था, तो योजना क्यों बदली गई।

न्यायमूर्ति संदीप शर्मा ने संजौली के आठ निवासियों द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिए। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि सुरंग के निर्माण के कारण आवासीय भवनों को संरचनात्मक क्षति हुई है।

याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि एनएचएआई ने पहले छकरैल, भट्टा कुफर और ढल्ली के माध्यम से प्रस्तावित सतही राजमार्ग के लिए भूमि का अधिग्रहण किया था। इस परियोजना के लिए विभिन्न भूस्वामियों और गृहस्वामियों को लगभग 600 करोड़ रुपये का मुआवजा वितरित किया गया था, जिसके परिणामस्वरूप 88 परिवारों को विस्थापित होना पड़ा था।

सुनवाई के दौरान, एनएचएआई के वकील ने अदालत को सूचित किया कि सुरंग का काम 18 सितंबर से निलंबित कर दिया गया है और आईआईटी रुड़की की विशेषज्ञ टीम द्वारा सुरक्षा पहलुओं पर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने तक फिर से शुरू नहीं किया जाएगा।

अदालत ने एनएचएआई के बयान पर संज्ञान लेते हुए कहा कि जब प्राधिकरण ने स्वयं कहा है कि विशेषज्ञ रिपोर्ट मिलने तक काम निलंबित रहेगा, तो सुरंग निर्माण को तुरंत निलंबित करने का निर्देश देने में कोई बाधा नहीं है। हालांकि, अदालत ने औपचारिक निषेधाज्ञा पारित करने से परहेज किया, लेकिन उम्मीद जताई कि अगली सुनवाई (17 नवंबर) तक कोई और निर्माण गतिविधि नहीं की जाएगी।

याचिकाकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया है कि एनएचएआई ने बिना किसी ठोस औचित्य के सतही राजमार्ग के प्रस्ताव को छोड़ दिया और इसके बजाय चलाउठी-संजौली-भट्टा कुफर के बीच जुड़वां सुरंगों का निर्माण करने का निर्णय लिया। उन्होंने यह भी प्रस्तुत किया कि भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई) द्वारा एक सलाह जारी की गई थी जिसमें पहाड़ी के माध्यम से सुरंग बनाने के खिलाफ चेतावनी दी गई थी, जहां सैकड़ों घर स्थित हैं, लेकिन इस सलाह को नजरअंदाज कर दिया गया।

इस मामले में केंद्रीय सरकार, हिमाचल प्रदेश सरकार, एनएचएआई और शिमला के उपायुक्त सहित अन्य को नोटिस जारी किए गए हैं, और उन्हें दो सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया गया है।

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