पक्षियों के लिए जानलेवा बना पतंगबाजी का सीजन, चाइनीज डोर में फंस कर दम तोड़ रहे परिंदे

प्रदेश में मकर संक्रांति से लेकर बसंत पंचमी तक चलने वाला पतंगबाजी का सीजन मूक पक्षियों के लिए काल बनता जा रहा है। इस दौरान चाइनीज डोर की चपेट में आकर...

पक्षियों के लिए जानलेवा बना पतंगबाजी का सीजन, चाइनीज डोर में फंस कर दम तोड़ रहे परिंदे

पक्षियों के लिए जानलेवा बना पतंगबाजी का सीजन, चाइनीज डोर में फंस कर दम तोड़ रहे परिंदे

प्रदेश में मकर संक्रांति से लेकर बसंत पंचमी तक चलने वाला पतंगबाजी का सीजन मूक पक्षियों के लिए काल बनता जा रहा है। इस दौरान चाइनीज डोर की चपेट में आकर प्रदेश में हर साल 150 से 500 पक्षी सीधे तौर पर मौत का शिकार हो रहे हैं, जबकि 500 से अधिक पक्षी गंभीर रूप से घायल हो जाते हैं। घायल पक्षियों में से करीब 60 प्रतिशत ऐसे होते हैं, जिनके पंख कट जाने के कारण वे जीवनभर दोबारा उड़ नहीं पाते। वन्यजीव संगठनों के आंकड़ों के अनुसार यह समस्या केवल हिमाचल तक सीमित नहीं है। भारत भर में हर साल पतंगबाजी के सीजन में हजारों पक्षी मारे जाते हैं और 15 हजार से अधिक पक्षी गंभीर रूप से घायल होते हैं। इन आंकड़ों में हिमाचल प्रदेश के मामले भी शामिल हैं।अनुमान के मुताबिक एक वर्ष में 1500 से 2000 पक्षी केवल चाइनीज डोर में उलझकर मौत के आगोश में चले जाते हैं। हिमाचल प्रदेश में चाइनीज और नायलॉन डारे पर पूर्ण प्रतिबंध लगा हुआ है, लेकिन इसके बावजूद इसकी बिक्री खुलेआम जारी है। देवभूमि पर्यावरण रक्षक मंच के अध्यक्ष नरेंद्र सैणी ने कहा कि प्रदेश में पतंग के मांझे पर प्रतिबंध होने के बावजूद इसकी खुलेआम बिक्री हो रही है। रोजाना दर्जनों पक्षी डोर में फंसकर अपनी जान गंवा रहे हैं।

प्रदेश के तीन जिलों में पतंगबाजी लोकप्रिय

प्रदेश में मंडी, कांगड़ा और सिरमौर जैसे क्षेत्रों में पतंगबाजी विशेष रूप से लोकप्रिय है। इन इलाकों में हर साल मकर संक्रांति और बसंत पंचमी के दौरान दर्जनों पक्षी, खासकर कबूतर, चील और कौवे डोर की चपेट में आकर दम तोड़ देते हैं।