मिड डे मील वर्करों को नहीं मिला मानदेय, अब हड़ताल पर उतरेंगे

 जिले में तीन माह से मिड डे मील वर्करों को मानदेय नहीं मिला है, जिससे वे गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं। सीटू के बैनर तले तीसा ब्लॉक के वर्कर...

मिड डे मील वर्करों को नहीं मिला मानदेय, अब हड़ताल पर उतरेंगे

मिड डे मील वर्करों को नहीं मिला मानदेय, अब हड़ताल पर उतरेंगे

 जिले में तीन माह से मिड डे मील वर्करों को मानदेय नहीं मिला है, जिससे वे गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं। सीटू के बैनर तले तीसा ब्लॉक के वर्कर अब 12 फरवरी को सरकार के खिलाफ हड़ताल करेंगे।
यह बात भंजराडू में मिड डे मील वर्कर यूनियन ब्लॉक तीसा की बैठक को संबोधित करते हुए सीटू के जिला अध्यक्ष नरेंद्र ने बात कही। उन्होंने कहा कि वर्करों को मात्र 4500 रुपये मासिक मानदेय मिलता है, वह भी समय पर नहीं मिल रहा है। मानदेय न मिलने से घर का राशन, बच्चों की फीस, इलाज और सामाजिक जिम्मेदारियों का निर्वहन करना मुश्किल हो गया है।
देश के बच्चों को कुपोषण से बचाने वाले मिड डे मील वर्करों का खुद का परिवार कुपोषण की कगार पर है। वर्करों को किसी प्रकार की छुट्टी की सुविधा नहीं है। हाईकोर्ट के 12 माह मानदेय संबंधी फैसले को भी लागू नहीं किया जा रहा, जबकि शिक्षा विभाग के अन्य कर्मचारियों को 12 माह का वेतन दिया जाता है।
25 बच्चों की शर्त के चलते कई वर्करों को नौकरी छोड़नी पड़ रही है। न सामाजिक सुरक्षा है और न ही सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन या आर्थिक सहायता की कोई व्यवस्था। बैठक में यह भी आरोप लगाया गया कि केंद्र सरकार के हालिया बजट में मिड डे मील योजना के लिए कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। केंद्र से मिलने वाला 1000 रुपये का अंशदान भी समय पर नहीं मिल रहा।
उन्होंने मांग उठाई कि प्रदेश में आंगनबाड़ी कर्मियों की तर्ज पर मिड डे मील कर्मियों को 12 से 20 छुट्टियां दी जाएं, साल में दो वर्दियां दी जाएं और मल्टी टास्क भर्ती में उन्हें प्राथमिकता मिले। अतिरिक्त कार्य के लिए अतिरिक्त वेतन, बंद स्कूलों के कर्मियों का अन्य स्कूलों में समायोजन, 25 बच्चों की शर्त समाप्त करने और प्रत्येक स्कूल में अनिवार्य रूप से दो मिड डे मील वर्करों की नियुक्ति की मांग भी उठाई गई।