शिक्षा के एक महत्वपूर्ण केंद्र की तरह स्थापित हो चुके जिला मुख्यालय धर्मशाला में स्थित विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों व कोचिंग सेंटर्स में पढऩे वाले छात्र...
कांगड़ा में सडक़ों पर टैक्सी-बस ड्राइवर
शिक्षा के एक महत्वपूर्ण केंद्र की तरह स्थापित हो चुके जिला मुख्यालय धर्मशाला में स्थित विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों व कोचिंग सेंटर्स में पढऩे वाले छात्रों के लिए सोमवार का दिन चुनौती भरा रहा। सोमवार को जिला कांगड़ा में प्राइवेट बस, टैक्सी, ऑटो, जीप-ट्रक यूनियन का ऑटोमैटिक टेस्टिंग स्टेशन (एटीएस) रानीताल के गाहलियां में पासिंग के विरोध में सुबह आठ बजे से शुरू हुई हड़ताल व एक बजे के बाद किए गए चक्का जाम ने सामान्य जनजीवन पूरी तरह से प्रभावित कर दिया। धर्मशाला-मकलोडगंज व अंतरराज्यीय बस टर्मिनल के मुख्य गांधी चौक में निजी आपरेटरों के चक्का जाम किए जाने के बाद हजारों की संख्या में पर्यटक व लोग परेशान हुए।
हड़ताल के चलते सभी स्कूल बसें, निजी बसें व टैक्सियां बंद रही, जिसके चलते जिला में यातायात के साधन के रूप में केवल निगम की बसें ही एकमात्र विकल्प के रूप में उपस्थित रहीं। धर्मशाला में स्थित कोचिंग सेंटर्स में पढऩे वाले छात्र छुट्टी वाले दिन भी कक्षाएं लगाने व गाइडेंस के लिए अपने-अपने कोचिंग सेंटर्स का रुख करते हैं, लेकिन सोमवार को सभी निजी बसों व टैक्सियों की हड़ताल के चलते कोचिंग सेंटर्स के साथ निजी स्कूल व कालेजों को भी मजबूरन छुट्टी घोषित करनी पड़ी। इसके चलते कार्य दिवस पर स्कूली छात्रों व कोचिंग सेंटर्स में पढऩे वाले अभ्यर्थियों से ओत-प्रोत दिखने वाले धर्मशाला के कचहरी व सिविल लाइन क्षेत्र में सोमवार को युवाओं का अभाव देखने को मिला। आपरेटरों की यह हड़ताल सोमवार सायं काल में खबर लिखे जाने के समय तक जारी है तथा आपरेटरों ने मंगलवार को भी इस हड़ताल को जारी रखने की घोषणा की है।
डीसी कांगड़ा हेमराज बैरवा ने क्या कहा
डीसी कांगड़ा हेमराज बैरवा का कहना है कि एटीएस प्रणाली को केंद्र सरकार की ओर से शुरू किया गया है, जिसे लेकर पत्राचार किया जा रहा है, इसके तहत ही आगामी कदम उठाए जांएगे।
डीसी कांगड़ा के आने की मांग पर अड़े आपरेटर्स
धर्मशाला में सडक़ पर बैठे कामर्शियल व्हीकल आपरेटर्स से बातचीत करने सुबह सवा 11 बजे के करीब एसडीएम धर्मशाला मोहित रत्न, तहसीलदार धर्मशाला गिरिराज सिंह के साथ पहुंचे थे, लेकिन आपरेटर्स डीसी कांगड़ा के आने की मांग कर रहे थे। एडीएम कांगड़ा शिल्पी बेक्टा भी एक बजे तक आपरेटर्स से बात करने पहुंची, करीब आधे घंटे तक आपरेटर्स व एडीएम के बीच बातचीत हुई, फिर भी समाधान नहीं निकला। एडीएम शिल्पी के साथ पुलिस बल व क्यूआर की टीम के पहुंचने के बावजूद फुटपाथ पर ही बैठी रही और प्रदर्शनकारियों से भी बातचीत करती रही। लेकिन पांच से छह घंटे तक जारी चक्का जाम में उसके कोई सार्थक परिणाम देखने को नहीं मिले।