बरसात के दिन तीन-चार फुट पानी में डूब जाते थे घर मंडी जिला में बल्ह उपमंडल के अंतर्गत चंडयाल गांव में एक पूरा मकान जमीन से लगभग छह फुट ऊपर उठाकर व्...
मंडी में जमीन से छह फुट ऊपर उठा दिया पूरा मकान
बरसात के दिन तीन-चार फुट पानी में डूब जाते थे घर
मंडी जिला में बल्ह उपमंडल के अंतर्गत चंडयाल गांव में एक पूरा मकान जमीन से लगभग छह फुट ऊपर उठाकर व्यवस्थित कर दिया गया। नागचला से पंडोह के बीच बन रहे फोरलेन सडक़ के निर्माण से भडय़ाल के पास बरसात में सुकेती खड्ड में आई भारी बाढ़ का पानी अवरुद्ध हो जाने से चंडयाल के बहुत से घर में तीन से चार फुट पानी में डूब गए। यहां के निवासी नरेश कुमार शर्मा के मकान में भी लगभग तीन फुट पानी जमा हो गया था। यह ऐसी परिस्थिति थी, जिससे इन्हें हर साल बरसात के मौसम में गुजरना पडऩा था। इसका एकमात्र हल बिल्डिंग को जमीन से लगभग पांच-छह फुट ऊपर उठाना ही था। इसके लिए नरेश कुमार ने पटियाला की एक फर्म दादा बिल्डर्स से संपर्क किया, जो बिल्डिंग लिफ्टिंग एंड शिफ्टिंग का काम करती है। इस फर्म ने 13 मजदूरों के लगभग दो महीनों के परिश्रम से इस पूरे मकान को जमीन से लगभग छह फुट ऊपर उठाकर व्यवस्थित कर दिया और मकान बिलकुल सुरक्षित हालत में है। फर्म के मालिक हरविंदर सिंह ने बताया कि इस कार्य के लिए लगभग 200 जैक का प्रयोग किया गया।
फर्म के मालिक हरविंदर सिंह ने बताया कि बिल्डिंग की लिफ्टिंग और शिफ्टिंग के लिए कम से कम दो महीने का समय लग जाता है
उन्होंने बताया कि सर्वप्रथम उन्होंने मकान के अंदर से दीवारों की नींव के साथ लगभग दो फुट खुदाई करके कंक्रीट का प्लेटफार्म तैयार किया। पहले इस पर जैक लगा कर बिल्डिंग को संतुलित किया। इसके उपरांत बिल्डिंग के पिल्लर काट कर टाई बीम के नीचे लगभग दो सौ मेकेनिकल जैक लगा कर एक निश्चित तारतम्य से सभी जैक की चूडिय़ां घुमाते हुए सारी बिल्डिंग का भार इन्ही जैकों पर ले लिया, फिर इन जैक को एकसाथ घुमाते हुए पूरे मकान को जमीन से लगभग छह फुट ऊपर उठा दिया। इस तरह पूरे का पूरा घर बिना नुकसान के जमीन से लगभग छह फुट ऊपर हवा में उठा दिया गया। अब इस मकान को पिल्लर और चिनाई की मदद से फाउंडेशन पर टिका दिया जाएगा और यह मकान बरसात में बाढ़ के पानी में जलमग्न हो जाने से सुरक्षित हो जाएगा। इससे पहले भी इसी गांव में मोहन लाल सैणी का तीन मंजिला मकान भी इसी तकनीक से जमीन से छह फुट ऊपर उठाया गया था। हरविंदर सिंह ने बताया कि वह लगभग 24 साल से इस कार्य को कर रहे हैं और लगभग सवा सौ बिल्डिंग लिफ्ट और शिफ्ट कर चुके हैं। अभी कुछ साल पूर्व नगवाईं में एक बिल्डिंग को उठा कर सडक़ से 120 फुट दूर शिफ्ट किया था, क्योंकि यह बिल्डिंग फोरलेन सडक़ की जद में आ रही थी। उन्होंने बताया कि एक बिल्डिंग की लिफ्टिंग और शिफ्टिंग के लिए कम से कम दो महीने का समय लग जाता है। हालांकि यह तकनीक खर्चीली जरूर है, लेकिन इससे मकान को जरूरत अनुसार लिफ्ट या शिफ्ट किया जा सकता है, जिससे मकान को तोडऩे और फिर से बनाने की जरूरत नही पड़ती।