UGC New Rules : यूजीसी नियमों के खिलाफ सुनवाई को सुप्रीम कोर्ट तैयार

जातिगत भेदभाव से जुड़े यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट तैयार हो गया है। शीर्ष न्यायालय ने बुधवार को इस याचिका...

UGC New Rules : यूजीसी नियमों के खिलाफ सुनवाई को सुप्रीम कोर्ट तैयार

UGC New Rules : यूजीसी नियमों के खिलाफ सुनवाई को सुप्रीम कोर्ट तैयार

जातिगत भेदभाव से जुड़े यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट तैयार हो गया है। शीर्ष न्यायालय ने बुधवार को इस याचिका को सूचीबद्ध करने की मंजूरी दे दी है। याचिकाकर्ता का कहना है कि नए नियमों के तहत सामान्य वर्ग से आने वाले छात्रों को शिकायत निवारण जैसी सुरक्षा नहीं मिलेगी। साथ ही इन्हें लागू होने से रोकने के निर्देश देने की मांग की। बुधवार को तत्काल सुनवाई के लिए भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के सामने याचिका पेश की गई। इस पर उन्होंने कहा कि हमें पता है क्या हो रहा है। यह पक्का करें कि सारी कमियां दूर हो जाएं। हम इसे सूचीबद्ध करेंगे। उधर, देशभर में जनरल कैटेगरी के छात्रों और सवर्ण जाति के लोगों का यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (यूजीसी) के नए नियमों को लेकर विरोध और तेज हो गया है। यूपी-बिहार में बुधवार को भी जमकर हंगामा हुआ।

छात्र और सवर्ण जातियों के लोग सडक़ों पर उतरे। यूपी के पीलीभीत में सवर्ण समाज के युवकों ने मुंडन कराया। बिहार में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के पोस्टर पर कालिख पोती गई। उधर, हरियाणा में इस मामले में भाजपा के अंदर ही फूट देखने को मिली। जहां भाजपा के एक पूर्व विधायक ने नए नियम की खुलेआम खिलाफत की, वहीं दो मौजूदा विधायक भी इन नियमों से खुश नहीं दिखे। उधर, बसपा सुप्रीमो मायावती ने नए नियमों का समर्थन किया।

यूजीसी के नए नियमों को लेकर अब भाजपा के अंदर भी रार दिखने लगी है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व राज्यपाल कलराज मिश्र ने नए नियमों को पूरी तरह असंवैधानिक बताते हुए इन्हें वापस लेने की मांग की है। कलराज मिश्र ने कहा है कि एससी-एसटी के भेदभाव पर वे शिकायत कर सकते थे, करते थे, 2012 के अंतर्गत जो गाइडलाइन थी, उसमें यह था, अब इसमें ओबीसी को भी जोड़ा गया है। हमारा कहना है कि इसमें अलग-अलग जाति के आधार की बजाए सभी लोगों को अधिकार देना चाहिए कि जिसके खिलाफ भी भेदभाव हो रहा है, वह शिकायत कर सके। दूसरे इसमें झूठी शिकायत करने वालों के खिलाफ भी दंड का प्रावधान होना चाहिए, जो अभी नहीं है।