लगातार खराब मौसम ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। बीते कई दिनों से हो रही बारिश, ओलावृष्टि से गेहूं, आलू और हरी सब्जियों की फसल बुरी तरह प्रभावित हो रह...
लगातार खराब मौसम से गेहूं और हरी सब्जियों हो रही खराब
लगातार खराब मौसम ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। बीते कई दिनों से हो रही बारिश, ओलावृष्टि से गेहूं, आलू और हरी सब्जियों की फसल बुरी तरह प्रभावित हो रही है। खेतों में पककर तैयार गेहूं की फसल अतिरिक्त नमी के कारण खराब होने लगी है जबकि आलू की फसल बीमारी की चपेट में आकर झुलस रही है। किसानों का कहना है कि अगले कुछ दिन तक भी मौसम साफ नहीं हुआ तो उनके पास खाने लायक ही अनाज बचेगा।
ऊना में करीब 30 हजार हेक्टेयर भूमि पर गेहूं की फसल तैयार की गई है। वहीं 1000 हेक्टेयर से अधिक भूमि पर आलू की खेती हो रही है। इसके अलावा बड़ी मात्रा में किसान हरी सब्जियों की खेती भी करते हैं। इन दिनों फसल कटाई और खुदाई का समय है लेकिन लगातार हो रही बारिश के कारण किसान खेतों में नहीं उतर पा रहे। सबसे ज्यादा असर गेहूं की फसल पर पड़ रहा है। खेतों में पककर तैयार गेहूं बारिश के कारण गिर रही है। कई स्थानों पर बालियों में अतिरिक्त नमी भरने से दाना काला और सड़ने लगा है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कटाई से पहले गेहूं लंबे समय तक भीगी रहती है तो उत्पादन घटने के साथ गुणवत्ता भी खराब हो जाती है। इससे किसानों को मंडियों में कम दाम मिलने की आशंका है।
आलू की फसल की स्थिति भी चिंताजनक बनी हुई है। किसानों के अनुसार लगातार नमी रहने से आलू के पौधों में झुलसा रोग तेजी से फैल रहा है। कई खेतों में पौधे काले पड़ गए हैं और पत्तियां सूखने लगी हैं। इससे आलू का आकार छोटा रह गया है और उत्पादन पर सीधा असर पड़ने की संभावना है।
किसानों में उमेश सिंह, कमलजीत सिंह, रामपाल, शाम लाल, बलबीर चंद कहना है कि यदि अगले कुछ दिनों तक मौसम का यही हाल रहा तो उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। कई किसानों ने प्रशासन से फसलों के नुकसान का सर्वे कराकर मुआवजा देने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि पहले ही खेती की लागत लगातार बढ़ रही है, ऐसे में मौसम की मार ने उनकी कमर तोड़ दी है।
उपनिदेशक जिला कृषि विभाग डॉ. प्रेम ठाकुर ने बताया कि खराब मौसम के कारण फसलों को नुकसान की सूचनाएं मिल रही हैं। विभागीय टीमें प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर रही हैं। किसानों को सलाह दी गई है कि मौसम साफ होते ही खेतों से पानी की निकासी करें और आलू व सब्जियों में रोग रोकने के लिए आवश्यक दवाओं का छिड़काव करें।