हिमाचल में एक-एक कमरे में चल रहे 470 सरकारी स्कूल, 2122 के पास महज दो-दो क्लासरूम

हिमाचल प्रदेश में सरकारी स्कूलों में गुणात्मक शिक्षा, बेहतर शैक्षणिक वातावरण और विद्यार्थियों को आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध करवाने के दावों के बीच स्कूल भ...

हिमाचल में एक-एक कमरे में चल रहे 470 सरकारी स्कूल, 2122 के पास महज दो-दो क्लासरूम

हिमाचल में एक-एक कमरे में चल रहे 470 सरकारी स्कूल, 2122 के पास महज दो-दो क्लासरूम

हिमाचल प्रदेश में सरकारी स्कूलों में गुणात्मक शिक्षा, बेहतर शैक्षणिक वातावरण और विद्यार्थियों को आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध करवाने के दावों के बीच स्कूल भवनों की स्थिति एक बड़ी चुनौती के रूप में सामने आई है। यू-डाइस के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में एक-एक कमरे के 470 और दो-दो कमरों के 2,122 प्राइमरी और मिडल स्कूल हैं। एक-एक कमरों वाले 282 प्राइमरी, 181 मिडिल, पांच हाई और दो वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल शामिल हैं। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि जिन स्कूलों में एक ही कमरे के सहारे कई कक्षाओं के विद्यार्थियों को पढ़ाना पड़ता है, वहां बच्चों को अलग-अलग कक्षाओं के अनुरूप पढ़ाई का माहौल कैसे मिल पाता होगा।

प्रदेश में 9,720 प्राइमरी और 1735 मिडल स्कूल
प्रदेश में 9,720 प्राइमरी और 1735 मिडल स्कूल हैं। प्राइमरी और मिडिल स्तर पर 2,585 स्कूलों में एक या दो कमरे दर्ज हैं। यह स्थिति स्कूलों में उपलब्ध आधारभूत ढांचे और बहु-कक्षीय शिक्षण की जरूरतों के बीच अंतर को उजागर करती है। एक कमरे वाले स्कूलों में पहली से पांचवीं तक की कक्षाओं को एक साथ संचालित करना, अलग-अलग कक्षाओं के लिए समय और शिक्षण सामग्री का प्रबंधन करना तथा विद्यार्थियों को पर्याप्त व्यक्तिगत ध्यान देना शिक्षकों के लिए चुनौतीपूर्ण हो गया है। मिडिल स्तर पर छठी से आठवीं तक के विद्यार्थियों की जरूरतें और विषयों की विविधता इस चुनौती को और बढ़ाती हैं। प्रदेश में प्राथमिक स्तर पर कुल 9,720 स्कूल दर्ज हैं। इनमें सबसे अधिक 1,913 स्कूलों में दो-दो कमरे हैं, जबकि 3,733 स्कूलों में तीन-तीन और 3,523 स्कूलों में चार से छह कमरे उपलब्ध दर्ज हैं। सात से दस कमरे वाले प्राथमिक स्कूलों की संख्या 251 है। 11 से 15 कमरे वाले स्कूल केवल 18 हैं, जबकि 15 से अधिक कमरे वाला कोई प्राथमिक स्कूल इस तालिका में दर्ज नहीं है।

प्रदेश के 1,735 मिडिल स्कूलों में 181 स्कूलों के पास एक कमरा और 209 के पास दो कमरे हैं। सबसे बड़ी संख्या 1,014 स्कूलों की है, जिनमें तीन कमरे दर्ज हैं। चार से छह कमरे वाले स्कूल 307 हैं, जबकि सात से दस कमरे वाले स्कूलों की संख्या 23 है। केवल एक मिडिल स्कूल में 11 से 15 कमरे दर्ज हैं। मिडिल स्कूलों में छठी से आठवीं तक अलग-अलग कक्षाओं और विषयों के अनुसार पढ़ाई की व्यवस्था करनी होती है। ऐसे में कमरों की उपलब्धता के साथ-साथ उनकी स्थिति, विद्यार्थियों की संख्या और शिक्षक-विद्यार्थी अनुपात भी महत्वपूर्ण हो जाते हैं।

सरकारी स्कूलों में साधनों की कमी को दूर करने के प्रयास जारी हैं। कई स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या भी नाममात्र है। इनकी समीक्षा की जा रही। कांप्लेक्स सिस्टम बनाकर साथ लगते स्कूल भवनों का भी प्रयोग किया जा रहा है। कमरों की कमी के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित ना हो, इसका विशेष ध्यान रखा जा रहा है।