वन भूमि से कशमल की जड़ें नहीं निकलने का दो महीने से राग अलापने वाले अधिकारियों की हवा उस समय निकल गई जब धर्मशाला से आए उड़नदस्ते ने मसरूंड रेंज के परि...
धर्मशाला से आए उड़नदस्ते ने जब्त कीं 250 क्विंटल कशमल की जड़ें
वन भूमि से कशमल की जड़ें नहीं निकलने का दो महीने से राग अलापने वाले अधिकारियों की हवा उस समय निकल गई जब धर्मशाला से आए उड़नदस्ते ने मसरूंड रेंज के परिक्षेत्र में 250 क्विंटल कशमल की जड़ें जब्त कीं।
रेंज में कार्यरत वन परिक्षेत्र अधिकारी, वन खंड अधिकारी और वन रक्षक कह रहे थे कि उनके परिक्षेत्र में वन भूमि से तो दूर निजी भूमि से भी जड़ों को नहीं निकाला जा रहा है।
स्थानीय लोग, सेवानिवृत्त वन अधिकारी और सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी बार-बार सोशल मीडिया पर अवैध तरीके से कशमल की जड़ों का दोहन होने की शिकायतें कर रहे थे। इसकी सत्यता जानने के लिए उच्चाधिकारियों ने धर्मशाला से फ्लाइंग स्क्वायड को मसरूंड रेंज में निरीक्षण करने के निर्देश दिए। करीब तीन दिन तक टीम जंगलों और अन्य क्षेत्रों में जांच करती रही। सड़क के किनारे रखीं कशमल की जड़ों को तो टीम ने पकड़ा ही, साथ में जंगलों में उखाड़कर रखीं जड़ें भी जब्त कर लीं। जब्त जड़ों को वन मंडल चंबा को सौंप दिया है।
धर्मशाला से पकड़ी गईं कशमल की जड़ों की रिपोर्ट चंबा भी भेजी है। यह पता लगाया जा रहा है कि जिस मात्रा में कशमल की जड़े पकड़ी गई हैं और ट्रांसपोर्ट हुई हैं, उन्हें निजी भूमि से निकाला है या अवैध तरीके से वन भूमि से उखाड़ा है। जहां टीम ने कशमल की जड़ें पकड़ी हैं, उस क्षेत्र से संबंधित राजस्व विभाग की निशानदेही की रिपोर्ट भी विभाग से मांगी जाएगी।
फ्लाइंग स्क्वायड के डीएफओ डीएस डढवाल ने बताया कि टीम ने मसरूंड रेंज के परिक्षेत्र में रेड कर 250 क्विंटल कशमल की जड़ें पकड़ी हैं। इस मामले में आगामी प्रक्रिया को पूरा किया जा रहा है।
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160 ट्रकों में बाहरी राज्यों में भेजीं 16000 क्विंटल कशमल की जड़ें
चंबा-तीसा मार्ग पर बड़ोह में वन विभाग के बैरियर से मिली जानकारी कि अनुसार दो महीने में कशमल की जड़ों से लदे 160 ट्रक वहां से जा चुके हैं। अभी भी ट्रकों के जाने का सिलसिला जारी है। एक ट्रक में 100 क्विंटल जड़े लादी जाती हैं। 160 ट्रकों में अब तक करीब 16000 क्विंटल कशमल की जड़ें बाहरी राज्यों में भेजी जा चुकी हैं। आखिरकार इतनी अधिक मात्रा में किन लोगों ने अपने खेतों में जड़े उगाईं, इसके लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।