जिले के घने जंगल इन दिनों किसी शांत हरियाली की कहानी नहीं, बल्कि दहकती लपटों की बेचैन दास्तां बन चुके हैं। पेड़ों की फुसफुसाहट अब धुएं में खो गई है। ह...
दांव पर जान, दहकते जंगल को बचाने आग से लड़ रहे वन कर्मी
जिले के घने जंगल इन दिनों किसी शांत हरियाली की कहानी नहीं, बल्कि दहकती लपटों की बेचैन दास्तां बन चुके हैं। पेड़ों की फुसफुसाहट अब धुएं में खो गई है। हवा में बस जलती हुई वन संपदा की कराह तैर रही है। कहीं झाड़ियों की आड़ में आग सरक रही है तो कहीं वर्दीधारी वनकर्मी अपनी जान की परवाह किए बिना राख होते जंगल को बचाने की जंग लड़ रहे हैं। यह सिर्फ आग नहीं, बल्कि प्रकृति और लापरवाही के बीच चल रही एक ऐसी लड़ाई है जिसका हर पल चंबा के भविष्य पर सवाल छोड़ रहा है।
दांव पर जान... दहकते जंगल को
बचाने आग से लड़ रहे वन कर्मी
चंबा के जंगलों में पिछले कई दिनों से भड़की भयंकर आग, नहीं लग पा रहा विराम
हाथ में झाड़ियों के लट्ठ लेकर आग को बुझाने के लिए डटे नजर आए कर्मचारी
अज्ञात लोग जंगल में भड़का रहे आग, वन विभाग चाहकर भी नहीं कर पा रहा कार्रवाई
चंबा। दिन : वीरवार, समय : सुबह 11 बजे, स्थान : चंबा वन मंडल के दायरे में आने वाला मंगला का जंगल। वन विभाग के कर्मचारी जंगल में भड़की भयंकर आग को नंगे हाथों से झाड़ियों के लट्ठा पकड़कर बुझाने में जुटे हैं। उनकी सुरक्षा के भी कोई इंतजाम नहीं हैं। अपनी ड्यूटी निभाने के लिए वन रक्षक और अन्य कर्मी आग से जंग लड़ रहे हैं। 11:15 बजे मंगला से थोड़ी आगे टपूण मार्ग पर जंगल में भयंकर आग भड़की नजर आई। जंगल में थोड़ा भीतर वन कर्मी वर्दी पहनकर आग बुझाते नजर आए। उनसे पूछा गया कि वे आग बुझाने के लिए इतना खतरा क्यों उठा रहे हैं तो जवाब दिया कि इन्हीं जंगलों की रखवाली के लिए सरकार और विभाग ने उन्हें नौकरी पर रखा है। वे अपना फर्ज निभा रहे हैं। दोपहर 12 बजे भड़ियांकोठी के साथ लगते जंगल से भयंकर लपटें उठ रही थीं। इन लपटों के बीच में वन कर्मचारी आग बुझाने में लगे हैं। शाम सवा तीन बजे आसमान से बरसी बारिश के बूंदों ने कुछ हद तक जंगल की आग को बुझाने में मदद की लेकिन पूरी तरह आग फिर भी नहीं बुझ पाई