रावी नदी का जलस्तर बढ़ते ही जिन इलाकों में खतरे की घंटी बजने लगती है, उन्हीं नदी के मुहानों पर अब निर्माण गतिविधियां सवाल खड़े कर रही हैं। बालू और पर...
रावी की गोद में बन रहीं इमारतें, खतरे को रोकने वाले नियम बेबस
रावी नदी का जलस्तर बढ़ते ही जिन इलाकों में खतरे की घंटी बजने लगती है, उन्हीं नदी के मुहानों पर अब निर्माण गतिविधियां सवाल खड़े कर रही हैं।
बालू और परेल के पास रावी नदी के मुहानों में कई दिनों से निर्माण कार्य चलने की बात सामने आई है। नदी के आठ मीटर दायरे में निर्माण पर रोक के नियम के बावजूद यहां निर्माण कैसे शुरू हुआ और इसकी अनुमति किस स्तर से मिली, इसे लेकर सवाल उठ रहे हैं।
नदी के किनारे निर्माण को लेकर प्रशासन और संबंधित विभागों की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। यदि निर्माण के लिए अनुमति या एनओसी जारी की गई है तो उसकी वैधता जांच का विषय है। वहीं, यदि बिना अनुमति के निर्माण हो रहा है तो इसे रोकने में देरी क्यों हुई, यह भी बड़ा सवाल है।
रावी नदी बरसात के दौरान किस तरह अपना रौद्र रूप धारण करती है, इसका उदाहरण पिछले वर्ष देखने को मिला था। नदी का जलस्तर बढ़ने पर बालू, सरोल, होली, धरवाला सहित कई स्थानों पर नदी के आसपास रहने वाले लोगों को घर खाली करवाने पड़े थे। ऐसे हालात में नदी के मुहाने पर नए निर्माण भविष्य में बड़े खतरे का कारण बन सकते हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि नियमों का पालन सभी के लिए समान होना चाहिए। नदी के संवेदनशील क्षेत्रों में निर्माण की अनुमति देने से पहले सुरक्षा पहलुओं की गंभीरता से जांच जरूरी है।
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यदि कोई गरीब रावी नदी के तट से रेत लेकर जाए या कोई निर्माण करे तो विभाग कार्रवाई करने पहुंच जाते हैं। कोई बड़ा आदमी ऐसा करता है तो सभी नियम दब जाते हैं।
रावी नदी के मुहाने पर निर्माण एक जिंदगी के लिए हानिकारिक नहीं है, बल्कि उस भवन में रहने वाला हर शख्स खतरे के साये में होगा। - सोनू ठाकुर
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बालू में रावी मुहाने पर चल रहे निर्माण कार्य को दो दिन पहले बंद करवा दिया गया था। निर्माणकर्ता ने निजी आर्किटेक्ट से नक्शा बनाकर कार्य शुरू किया था जबकि नगर परिषद ने उस नक्शे को मंजूरी नहीं दी है। संबंधित आर्किटेक्ट को भी बुलाया गया है।
-राखी कौशल, वरिष्ठ कार्यकारी अधिकारी, नगर परिषद