हिमाचल पथ परिवहन निगम चंबा डिपो के दूरस्थ रूट चंबा-मनाली, चंबा-मंडी और न्याग्रां-फटाहर रूट पर अब नगरोटा, पालमपुर और बैजनाथ डिपुओं की बसें दौड़ती नजर आ...
चंबा के तीन रूटों पर दौड़ेंगी दूसरे डिपुओं की बसें
हिमाचल पथ परिवहन निगम चंबा डिपो के दूरस्थ रूट चंबा-मनाली, चंबा-मंडी और न्याग्रां-फटाहर रूट पर अब नगरोटा, पालमपुर और बैजनाथ डिपुओं की बसें दौड़ती नजर आएंगी। एचआरटीसी चंबा डिपो में बसों की बॉडी मरम्मत समेत अन्य कार्य करने वाले कारपेंटर का पद खाली है। हैरत की बात है कि रिक्त पद भरने के बजाय एचआरटीसी निदेशालय की ओर से रूट पर वैकल्पिक व्यवस्था करते हुए तर्क दिया गया है कि चंबा डिपो की बसों की मरम्मत होने पर उन्हें फिर से रूट पर दौड़ाया जाएगा। मनाली, मंडी और न्याग्रां-फटाहर रूट पर दूसरे जिलों के डिपुओं की बसों का दौड़ना लोगों के गले नहीं उतर रहा है।
एचआरटीसी चंबा डिपो के अधीन वर्तमान समय में 128 बसें हैं। इनमें 39 बसें जवाहर लाल नेहरू राष्ट्रीय शहरी नवीनीकरण मिशन की हैं। अमूमन 141 रूटों पर एचआरटीसी प्रबंधन बसों को चलाकर सवारियों को सहूलियत प्रदान करने का काम कर रहा है। बावजूद इसके हैरानी की बात है कि एचआरटीसी चंबा डिपो की बसों के कलपुर्जों समेत स्टाफ की कमी से जूझ रहा है। इन खामियों को पूरा करने के बजाय अब एचआरटीसी निदेशालय की ओर से रूटों पर बाहरी जिलों की बसों को वैकल्पिक व्यवस्था का नाम देकर दौड़ाने जा रहा है। शहरवासियों शादी लाल शर्मा, किशोर बडू, डॉ. डीके सोनी, सुरेश कश्मीरी और योगराज ने बताया कि एचआरटीसी चंबा डिपो को निदेशालय प्रबंधन इस प्रकार खत्म करने के चक्कर में है। डिपो में जहां चालक-परिचालक, कार्यालय कर्मचारियों, मेकेनिकों समेत कारपेंटर के पद रिक्त हैं तो वहीं दूसरी ओर बसों के आवश्यक कलपुर्जे तक उपलब्ध नहीं हैं। इन खामियों को दूर करने के बजाय निदेशालय रूटों पर दूसरे डिपुओं की बसें दौड़ाकर चंबा डिपो को खत्म करने पर ही तुला है जो सरासर गलत है।
चंबा-मंडी रूट पर चलने वाली नगरोटा बगवां डिपो की बस भी शहर पहुंचते ही बीच राह हांफ गई। देखते ही देखते सपड़ी और बाजार की ओर से वाहनों का लंबा जाम लग गया। सूचना मिलने के बाद मौके पर पहुंचे मेकेनिक ने खराबी को दुरुस्त किया। इसके बाद ही शहर से बस हटाई जा सकी।
डीडीएम शुगल सिंह ने बताया कि चंबा-मनाली, चंबा-मंडी और न्याग्रां-फटाहर रूट पर चलने वाली बसें अब तक 15 लाख किमी चल चुकी हैं। बसों की बॉडी और अन्य कार्य करने के लिए कारपेंटर तक नहीं है। लिहाजा, निदेशालय की ओर से दूसरे डिपुओं से वैकल्पिक व्यवस्था के तहत इन रूटों पर बसें चलाई जाएंगी। बसों की मरम्मत होने पर उन्हें फिर से चलाने के निदेशालय से आदेश हैं।