रावी क्रॉस कर बंदरों ने मचाया आतंक, उजाड़ दिए बागीचे

बजोली-होली जलविद्युत परियोजना के निर्माण से रावी नदी का जलस्तर न्यूनतम स्तर पर पहुंच गया है। रावी नदी के सूखने से प्राकृतिक सीमा खत्म हो गई है। इससे ब...

रावी क्रॉस कर बंदरों ने मचाया आतंक, उजाड़ दिए बागीचे

रावी क्रॉस कर बंदरों ने मचाया आतंक, उजाड़ दिए बागीचे

बजोली-होली जलविद्युत परियोजना के निर्माण से रावी नदी का जलस्तर न्यूनतम स्तर पर पहुंच गया है। रावी नदी के सूखने से प्राकृतिक सीमा खत्म हो गई है। इससे बंदरों और लंगूरों के झुंड आसानी से नदी पार कर सेब के बगीचों में तबाही मचा रहे हैं। पहले ये बंदर और लंगूर रावी नदी के सामने वाले पहाड़ों पर रहते थे। गहरी नदी जानवरों को आने से रोकती थी

मगर अब सूखी नदी उनके लिए रास्ता बन गई है। बागबान रिंकू, देश राज, शुभकरण, पूर्ण चंद, अनूप कुमार आदि का कहना है कि सेब के बगीचे ही एकमात्र आजीविका का सहारा हैं। इसके बलबूते वे अपने परिवार का पालन पोषण करते हैं। ऐसे अगर ये बगीचे ही नहीं बचे तो भविष्य पर वित्तीय बोझ बढु सकता है। उन्होंने वन विभाग से मांग की है कि इन लंगूरों और बंदरों पकडकर कही दूर जंगलों में छोड़ दिया जाए। ग्रामीणों ने साथ ही मांग की है कि या तो नदी में न्यूनतम जल प्रवाह सुनिश्चित किया जाए या बगीचों की सुरक्षा के लिए कंपनी की तरफ से जाले और मुआवजे का प्रबंध हो।