डलहौजी में आस लगाए बैठे लोगों और पर्यटकों के चेहरे मायूस, विंटर सीजन पर संकट पर्यटक नगरी डलहौजी में बीते कुछ दिनों से उमड़ रहे बादलों ने आखिरकार स्...
डलहौजी में बीते कुछ दिनों से उमड़ रहे बादलों ने किया निराश, न बर्फ, न बारिश
डलहौजी में आस लगाए बैठे लोगों और पर्यटकों के चेहरे मायूस, विंटर सीजन पर संकट
पर्यटक नगरी डलहौजी में बीते कुछ दिनों से उमड़ रहे बादलों ने आखिरकार स्थानीय लोगों और सैलानियों को निराश कर दिया। लंबे समय से बर्फबारी और बारिश की आस लगाए बैठे लोगों को उस समय मायूसी हाथ लगी जब आसमान में छाए घने बादल बिना बरसे ही आगे बढ़ गए। बादलों की इस बेरुखी से ठंड तो बढ़ी, लेकिन विंटर सीजन के बर्फीले नजारों का इंतजार अधूरा रह गया। पिछले दो-तीन दिनों से डलहौजी और आसपास के क्षेत्रों में बादलों की लगातार आवाजाही बनी हुई थी, जिससे बर्फबारी की प्रबल उम्मीद जताई जा रही थी। होटल व्यवसायियों से लेकर टैक्सी चालकों और पर्यटकों तक सभी को लग रहा था कि किसी भी समय पहाडिय़ां सफेद चादर ओढ़ लेगी, लेकिन बादलों के दगा दे जाने से उम्मीदों पर पानी फिर गया।
तापमान में गिरावट और ठंडी हवाओं से बढ़ी ठिठुरन
हालांकि बादलों की आवाजाही से तापमान में गिरावट दर्ज की गई है और ठंडी हवाओं ने ठिठुरन बढ़ा दी है। कारोबारियों को उम्मीद है कि मौसम में फिर बदलाव संभव है, जिससे बर्फबारी की संभावना से पूरी तरह इंकार नहीं किया जा सकता। फिलहाल पर्यटन कारोबारी और डलहौजी में पहुंचे सैलानी वाइट क्रिसमस और बर्फीले नजारों की आस लगाए हुए हैं। लंबे समय से बारिश न होने से शुष्क ठंड के प्रकोप के चलते लोग सर्दी-जुकाम व बुखार की चपेट में आ रहे हैं। बारिश के लिए रूढि़वादी सोच के चलते लोगों द्वारा जंगलों को आग लगाने से वातावरण में धुंआ फैलने से श्वास रोग से पीडित मरीजों को भी दिक्कतें पेश आ रही हैं। बारिश न होने से किसान खेतों में गेंहू सहित अन्य नकदी फसलों की बिजाई भी नहीं कर पा रहे हैं।