हिमाचल प्रदेश के हजारों टीजीटी शिक्षकों की वरिष्ठता पर असर डालने वाला बड़ा फैसला लेते हुए स्कूल शिक्षा निदेशालय ने वर्ष 2006 और 2007 में नियुक्त उन शि...
इन टीजीटी शिक्षकों को झटका, हाईकोर्ट के फैसले पर निदेशालय ने वापस लिए विशेष वरिष्ठता लाभ
हिमाचल प्रदेश के हजारों टीजीटी शिक्षकों की वरिष्ठता पर असर डालने वाला बड़ा फैसला लेते हुए स्कूल शिक्षा निदेशालय ने वर्ष 2006 और 2007 में नियुक्त उन शिक्षकों को दिए गए विशेष वरिष्ठता लाभ वापस ले लिए हैं, जिन्हें पहले 2002 की भर्ती प्रक्रिया से जुड़े मामलों के आधार पर वरिष्ठता का लाभ दिया गया था। निदेशालय ने इस संबंध में कार्यालय आदेश जारी कर अंतिम वरिष्ठता सूची में आंशिक संशोधन किया है। निदेशालय ने कार्यालय आदेश जारी कर अंतिम वरिष्ठता सूची में आंशिक संशोधन किया है। पहले इन शिक्षकों को वर्ष 2002 की भर्ती प्रक्रिया से जुड़े मामलों के आधार पर वरिष्ठता का लाभ दिया गया था। उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि 2006-07 में नियुक्त शिक्षक एक अलग भर्ती प्रक्रिया में चयनित हुए थे।
उन्होंने 2002 की भर्ती प्रक्रिया को लेकर समय रहते कोई कानूनी चुनौती नहीं दी। इसलिए वे सतीश कुमार एवं अन्य मामलों में दिए गए लाभों के हकदार नहीं हैं। वर्ष 2002 और 2012 की चयन प्रक्रिया से जुड़े कर्मचारियों को अदालत के निर्देशों के अनुसार लाभ दिए गए थे। हालांकि, 2006-07 के शिक्षक वर्ष 2005 के अलग विज्ञापन से चयनित हुए थे। यह कार्रवाई हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के विभिन्न फैसलों के अनुपालन में की गई है। विशेष रूप से एलपीए संख्या 836/2025 (कौशल चंद्र बनाम राज्य सरकार एवं अन्य) में 25 फरवरी 2026 को निर्णय दिया गया था। अदालत ने कहा कि जिन अभ्यर्थियों ने 2002 की भर्ती प्रक्रिया को चुनौती नहीं दी, वे लाभ के हकदार नहीं हैं। 2005 के अलग विज्ञापन से चयनित 2006-07 के शिक्षक इन लाभों से वंचित रहेंगे। यह फैसला शिक्षकों के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।