तिरंगे में लिपटे पिता को देख जो सजाया था सपना.. आज बेटी ने किया पूरा, अब बनीं लेफ्टिनेंट

हिमाचल प्रदेश की मिट्टी में 'वीरता' का बीज किस कदर गहरा बोया गया है, इसका जीवंत उदाहरण पालमपुर की आभा ने पेश किया है। यह कहानी केवल एक सैन्य अ...

तिरंगे में लिपटे पिता को देख जो सजाया था सपना.. आज बेटी ने किया पूरा, अब बनीं लेफ्टिनेंट

तिरंगे में लिपटे पिता को देख जो सजाया था सपना.. आज बेटी ने किया पूरा, अब बनीं लेफ्टिनेंट

हिमाचल प्रदेश की मिट्टी में 'वीरता' का बीज किस कदर गहरा बोया गया है, इसका जीवंत उदाहरण पालमपुर की आभा ने पेश किया है। यह कहानी केवल एक सैन्य अधिकारी बनने की नहीं है, बल्कि उस संकल्प की है जो एक ढाई साल की बच्ची के मन में तब उपजा था, जब उसने अपने पिता के तिरंगे में लिपटे पार्थिव शरीर को देखा होगा। आज वही आभा, भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बनकर अपने पिता की विरासत को नई ऊंचाइयों पर ले गई हैं।

विरासत में मिली जांबाजी

पालमपुर के कंडबाड़ी गाँव की आभा के रगों में सेना का अनुशासन पीढ़ियों से दौड़ रहा है। उनके दादा ने देश की सेवा की और पिता, नायक जीत सिंह (मेहर रेजिमेंट) ने साल 2003 में कश्मीर के अनंतनाग में आतंकियों से लोहा लेते हुए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया था। पिता की बहादुरी के लिए उन्हें मरणोपरांत 'सेना मेडल' से नवाजा गया था। आभा ने उस पिता को तस्वीरों और किस्सों में जिया और अंततः उन्हीं के पदचिन्हों पर चलने का फैसला किया।