नाले से शव निकालने के लिए चार घंटे तक संघर्ष चला

कागजों में मजबूत दिखने वाले आपदा से निपटने वाली तैयारियां की खुल गई पोल 100 फीट गहरे नाले में गिरी एक कार से तीन शव निकालने में लग गए चार घंटे र...

नाले से शव निकालने के लिए चार घंटे तक संघर्ष चला

नाले से शव निकालने के लिए चार घंटे तक संघर्ष चला

कागजों में मजबूत दिखने वाले आपदा से निपटने वाली तैयारियां की खुल गई पोल


100 फीट गहरे नाले में गिरी एक कार से तीन शव निकालने में लग गए चार घंटे
रस्सियों से बांधकर पुलिस और स्थानीय लोगों ने चट्टानों से उतरकर निकाले शव

जहां आपदा से निपटने के दावे कागजों में मजबूत दिखते हैं, वहीं जमीन पर हालात बिल्कुल उलट तस्वीर पेश करते हैं। 100 फीट गहरे नाले में गिरी एक कार से तीन शव निकालने में चार घंटे लग गए। रेस्क्यू अभियान में न तो कोई व्यवस्थित मार्ग था, न ही तेजी से काम करने वाला तंत्र नजर आया। रस्सियों के सहारे पुलिस और स्थानीय लोगों को चट्टानों से उतरकर राहत कार्य करना पड़ा। यह एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि क्या मेगा मॉक ड्रिल सिर्फ औपचारिकता बनकर रह गई है।

 

आपदा से निपटने की तैयारी की पोल उस समय खुल गई जब 100 फीट गहरे नाले से तीन शव निकालने में चार घंटे लग गए। पुलिस और स्थानीय लोगों ने रस्सी से बांधकर शव नाले से निकाले। सुबह 11 बजे दुर्घटना हुई। 11:30 बजे शव और घायलों को निकालने के लिए रेस्क्यू अभियान शुरू हुआ। पहले तो पुलिस और लोगों को दुर्घटनाग्रस्त कार तक पहुंचने में काफी समय लग गया। वहां पहुंचने के लिए कोई रास्ता नहीं था। चट्टान से उतरते हुए रेस्क्यू दल नीचे पहुंचा। घायलों को स्ट्रेचर से बांधा गया और सड़क पर खड़े लोगों ने उन्हें ऊपर खींचा। इसके बाद उन्हें चंबा भेजने की व्यवस्था की गई।

शव को ऊपर पहुंचाना और भी कठिन था। तीनों शव कार के साथ पड़े थे। इन्हें स्ट्रेचर पर बांधकर ऊपर लाया गया। डॉक्टरों ने मौके पर शवों का पोस्टमार्टम किया। परिजनों ने शव अपनी सुपुर्दगी में लिए। शाम को 3:30 बजे शव नाले से निकाले जा सके।