बंदर के हमले में घायल महिला की हार्ट अटैक से मौत

शिमला के लोअर बाजार की 18 सितंबर की घटना राजधानी में 18 सितंबर को बंदर के हमले में घायल हुई 71 वर्षीय बुजुर्ग महिला मधु कोमर की इंदिरा गांधी मेडिकल...

बंदर के हमले में घायल महिला की हार्ट अटैक से मौत

बंदर के हमले में घायल महिला की हार्ट अटैक से मौत

शिमला के लोअर बाजार की 18 सितंबर की घटना

राजधानी में 18 सितंबर को बंदर के हमले में घायल हुई 71 वर्षीय बुजुर्ग महिला मधु कोमर की इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी) में ह्रदयघात से मौत हो गई है। शहर के लोअर बाजार की रहने वाली बुजुर्ग महिला 27 सितंबर को आईजीएमसी अस्पताल में भर्ती हुई थी। महिला ने सोमवार को दम तोड़ दिया। शिमला व्यापार मंडल के पूर्व अध्यक्ष इंद्रजीत सिंह के अनुसार 18 सितंबर को बुजुर्ग महिला घर पर थी। परिचितों ने बताया कि दिन के समय किसी काम से यह घर से बाहर निकली और जैसे ही सीढ़ियों पर जाने लगी कि अचानक बंदर ने इन्हें धक्का मार दिया। इससे महिला सीढ़ियों पर गिर गई और इनके बाजू और टांग में चोटें लग गईं। इन्हें प्राथमिक उपचार दिया गया। इसके बाद महिला घर पर थी और ठीक थी।

बंदरों के हमले लगातार बढ़ रहे हैं, इन्हें रोकने के लिए उठाए जाएं सख्त कदम

27 सितंबर को अचानक तबीयत खराब होने पर इन्हें आईजीएमसी के आपातकालीन वार्ड में भर्ती कराया गया। उपचार के बावजूद उनकी हालत गंभीर बनी रही और दो दिन तक निगरानी में रहने के बाद सोमवार को सुबह 11:00 बजे महिला ने दम तोड़ दिया। डॉक्टरों का कहना है कि बंदरों के हमले के कारण सीधे तौर पर मृत्यु नहीं हुई बल्कि चोट और उसके बाद स्वास्थ्य में उत्पन्न जटिलताओं के चलते कार्डियक अरेस्ट हुआ जो मौत का कारण बना। पूर्व अध्यक्ष इंद्रजीत सिंह ने कहा कि शहर में बंदरों के हमले लगातार बढ़ रहे हैं, इन्हें रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जाएं।

बंदरों के हमले से जान गंवा चुके हैं लोग

राजधानी में बंदरों के हमले की यह पहली घटना नहीं है। शहर के साथ लगते ढांडा में कुछ महीने पहले 19 वर्षीय युवती हिमानी की भी बंदरों के हमले से गिरकर मौत हो गई थी। युवती बंदर के हमले के बाद भवन की तीसरी मंजिल से नीचे गिर गई थी। 2020 में कुफ्टाधार क्षेत्र में भी एक महिला की मौत बंदर की हमले के बाद गिरने से हुई थी।

बंदरों को पकड़ने का काम भी बंद

शिमला शहर में अब बंदरों को पकड़ने का काम भी बंद है। वन विभाग अब इनकी नसबंदी भी नहीं कर रहा। विभाग का कहना है कि अब केंद्र से इनकी नसबंदी के लिए पैसा नहीं आ रहा है। इसीलिए अब बंदर भी नहीं पकड़े जा रहे हैं। शहर में 1950 से ज्यादा बंदर हैं।