एक पुल टूटा, दो पंचायतों का रास्ता सालभर लंबा रहा

दो पंचायतों को जोड़ने वाला मरेडी के पास बना पुल एक साल से क्षतिग्रस्त है, लेकिन अभी तक इसकी मरम्मत नहीं हो पाई है। पिछले वर्ष भूस्खलन की चपेट में आने...

एक पुल टूटा, दो पंचायतों का रास्ता सालभर लंबा रहा

एक पुल टूटा, दो पंचायतों का रास्ता सालभर लंबा रहा

दो पंचायतों को जोड़ने वाला मरेडी के पास बना पुल एक साल से क्षतिग्रस्त है, लेकिन अभी तक इसकी मरम्मत नहीं हो पाई है। पिछले वर्ष भूस्खलन की चपेट में आने से क्षतिग्रस्त हुए इस पुल के स्थान पर न तो नया पुल बनाया गया और न ही पुराने पुल की मरम्मत की गई। इसके चलते करीब दो दर्जन गांवों के लोगों को आवाजाही के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है। मरेडी के पास बना यह पुल साल खड्ड को पार करने के लिए ग्रामीणों का प्रमुख जरिया था। यहां से लोग बाट पंचायत की ओर आते-जाते थे। पुल क्षतिग्रस्त होने के बाद लोगों की परेशानी बढ़ गई है। रोजमर्रा के काम, जरूरी सामान और अन्य कार्यों के लिए ग्रामीणों को वैकल्पिक रास्तों का सहारा लेना पड़ रहा है। एक साल का समय बीतने के बाद भी स्थिति जस की तस होने से ग्रामीणों में रोष है। उधर नागरिक उपमंडल अधिकारी चिराग शर्मा ने बताया कि उनके ध्यान में यह मामला अभी लाया गया है। जल्द ही इसकी जानकारी जुटाकर उचित कार्यवाही पुल की मरम्मत के लिए अमल में लाई जाएगी। एक साल में कंकरीट का पुल बनकर तैयार हो जाता है, लेकिन मरेडी में लोहे के पुल की मरम्मत करने में एक साल का समय बीत चुका है। ग्रामीण रोजाना परेशानी झेलने को मजबूर हैं। - हितेश कुमार प्रशासन, पंचायत प्रतिनिधियों को पुल बनाने के लिए कई बार ग्रामीण अवगत करवा चुके हैं। हर बार आश्वासन ही मिलता है। यही वजह है कि पुल की अभी तक मरम्मत नहीं हो पाई। - राकेश कुमार -- विकास के नाम पर भले ही करोड़ों रुपये खर्चे जा रहे हैं, लेकिन लाखों रुपये का पुल बनाने के लिए कोई भी विभाग दिलचस्पी नहीं दिखा रहा है। सैंकड़ों लोग इस पुल सुविधा से जुड़े हैं। - योग सिंह सरकार और प्रशासन को या तो मरेडी में नया पुल बनाना चाहिए या फिर क्षतिग्रस्त पुल की मरम्मत करवानी चाहिए, जिससे लोगों को खड्ड पार करने में कोई परेशानी न हो। - रमेश शर्मा, उपप्रधान बाट पंचायत