हिमाचल के छह शहरों में बिजली-पानी और सीवरेज की लाइनें होंगी अंडरग्राउंड

लोक निर्माण विभाग ने इसके लिए डक्ट पॉलिसी का प्रस्ताव तैयार कर लिया है। इसे मंजूरी के लिए प्रदेश सरकार को भेजा गया है। सरकार की मंजूरी के बाद पहले चरण...

हिमाचल के छह शहरों में बिजली-पानी और सीवरेज की लाइनें होंगी अंडरग्राउंड

हिमाचल के छह शहरों में बिजली-पानी और सीवरेज की लाइनें होंगी अंडरग्राउंड

लोक निर्माण विभाग ने इसके लिए डक्ट पॉलिसी का प्रस्ताव तैयार कर लिया है। इसे मंजूरी के लिए प्रदेश सरकार को भेजा गया है। सरकार की मंजूरी के बाद पहले चरण में प्रदेश के छह शहरों में इस व्यवस्था को लागू करने की तैयारी है।

हिमाचल प्रदेश के शहरों में अब बिजली, पानी, सीवरेज की लाइनें और केबल जमीन के नीचे एक व्यवस्थित डक्ट में डाली जाएंगी। लोक निर्माण विभाग ने इसके लिए डक्ट पॉलिसी का प्रस्ताव तैयार कर लिया है। इसे मंजूरी के लिए प्रदेश सरकार को भेजा गया है। सरकार की मंजूरी के बाद पहले चरण में प्रदेश के छह शहरों में इस व्यवस्था को लागू करने की तैयारी है। हमीरपुर, नादौन, देहरा, बद्दी और नालागढ़ शहर की सड़कों में डक्ट बनाने की योजना है। इसमें बिजली के तार, पानी के पाइप, सीवरेज लाइन और भविष्य में बिछाई जाने वाली अन्य यूटिलिटी सेवाओं के लिए जगह रखी जाएगी।

बार-बार सड़क की खोदाई नहीं करनी पड़ेगी
इससे किसी एक विभाग को अपनी लाइन डालने या मरम्मत के लिए बार-बार सड़क की खोदाई नहीं करनी पड़ेगी। विभागों के बीच समन्वय के साथ एक ही डक्ट का इस्तेमाल किया जा सकेगा। शहरों में बिजली, पानी और सीवरेज जैसी मूलभूत सुविधाओं की लाइनें बिछाने के लिए अकसर सड़कें खोदनी पड़ती हैं। इससे यातायात प्रभावित होने के साथ सड़क की गुणवत्ता भी खराब होती है। कई बार एक विभाग की ओर से सड़क बनाने के कुछ समय बाद ही दूसरे विभाग को लाइन डालने के लिए दोबारा खोदाई करनी पड़ती है। डक्ट पॉलिसी लागू होने के बाद इस समस्या से काफी हद तक छुटकारा मिलने की उम्मीद है।

शिमला में चल रहा निर्माण कार्य
लोक निर्माण विभाग के इंजीनियर इन चीफ एनपी सिंह ने कहा कि छह शहरों में इस पाॅलिसी को लागू किया जाना है। सरकार को इस बारे में प्रस्ताव भेजा गया है। राजधानी शिमला में बिजली और पानी की लाइनों को पहले ही अंडरग्राउंड करने का काम चल रहा है। इसी अनुभव को देखते हुए प्रदेश के अन्य प्रमुख शहरों में भी डक्ट व्यवस्था लागू करने की योजना बनाई जा रही है। पहले चरण के छह शहरों का चयन शहरी जरूरतों, सड़क नेटवर्क और विभिन्न यूटिलिटी सेवाओं की स्थिति को ध्यान में रखकर किया जाएगा।