बोलेरो हादसा ... संकरे रास्ते पर ग्रामीणों ने हाथों की चेन बनाकर चलाया रेस्क्यू अभियान सफेद कपड़े, तिरपाल और कंबलों में लपेटकर स्ट्रेचर क...
जब पहाड़ रास्ता न दे सका, हाथों ने पुल बना दिया
बोलेरो हादसा ... संकरे रास्ते पर ग्रामीणों ने हाथों की चेन बनाकर चलाया रेस्क्यू अभियान
सफेद कपड़े, तिरपाल और कंबलों में लपेटकर स्ट्रेचर के सहारे सड़क तक पहुंचाए शव
ग्रामीणों की मदद से संयुक्त टीम ने दो घंटे में पूरा किया रेस्क्यू अभियानखाई में मौत इंतजार कर रही थी और पहाड़ पर इंसानियत रास्ता बना रही थी। चंबा के दर्दनाक बोलेरो हादसे के बाद जब बचाव दल घटनास्थल तक पहुंचा तो सामने ऐसा दृश्य था जिसे देखकर हर कोई सन्न रह गया। शव झाड़ियों में बिखरे पड़े थे। रास्ता बेहद खतरनाक था लेकिन ग्रामीण पीछे नहीं हटे। हाथों की जंजीर और कंधों के सहारे उन्होंने उन शवों को बाहर निकाला जिन्हें पहाड़ ने अपनी गहराइयों में समेट लिया था।
मोहम्मद अयूब
चंबा। बोलेरो दुर्घटना में जान गंवाने वाले लोगों के शवों को घटनास्थल से सड़क तक पहुंचाने में स्थानीय लोगों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पुलिस, गृह रक्षक और अग्निशमन विभाग की संयुक्त टीम ग्रामीणों की सहायता से मौके पर पहुंची। शवों को स्ट्रेचर, सफेद कपड़े, तिरपाल और कंबलों में लपेटकर खाई से निकाला। खड़ी चढ़ाई, संकरे और ढलानदार रास्ते को पार करने के लिए ग्रामीणों ने हाथों की चेन बनाई। कड़ी मशक्कत के बाद शवों को सड़क तक पहुंचाया। इसके बाद सभी शव पोस्टमार्टम के लिए मेडिकल कॉलेज भेजे गए।
पुलिस अधीक्षक विजय सकलानी ने बताया कि वीरवार सुबह करीब 6:30 बजे सैर पर निकले कुछ लोगों ने सड़क के किनारे वाहन के टूटे शीशे और बिखरा सामान देखा। इससे उन्हें खाई में वाहन गिरा होने की आशंका हुई। उन्होंने इसकी सूचना पुलिस को दी।
सूचना मिलने पर सुबह करीब 8 बजे सदर थाना प्रभारी रमन चौधरी के नेतृत्व में पुलिस, गृह रक्षक और अग्निशमन विभाग की संयुक्त टीम घटनास्थल पर पहुंची। वाहन से एक महिला, आसपास पड़े दो अन्य शवों समेत छिटक कर झाड़ियों में गिरे शवों को बरामद किया। शवों को स्ट्रेचर, सफेद कपड़े और तिरपाल में लपेटकर सुरक्षित लाने का कार्य शुरू किया गया।
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... एक कंधा थक गया तो दूसरा आ गया शव उठाने
घटनास्थल तक पहुंचने और शवों को निकालने का रास्ता बेहद दुर्गम था। ग्रामीणों और बचाव दल ने स्ट्रेचर पर शवों को कंधों पर उठाया और खस्ताहाल पगडंडी से खड़ी चढ़ाई चढ़कर सड़क तक पहुंचाया। रास्ते में थकान होने पर लोग बारी-बारी से एक-दूसरे की मदद करते रहे। सड़क से कुछ दूरी पहले एक जगह पर शव रखकर राहत दल ने कुछ देर विश्राम किया। इसके बाद शव वाहन के माध्यम से मेडिकल कॉलेज भेजे। रेस्क्यू अभियान करीब दो घंटे तक चला।