हिमाचल पुलिस ने छात्रों की सुरक्षा के लिए 'स्कूल कनेक्ट' पहल की शुरुआत की

हिमाचल प्रदेश पुलिस ने राज्य में छात्रों की सुरक्षा और स्कूलों में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से एक नई पहल 'स्कूल कनेक्ट - स्कूल सुरक्...

हिमाचल पुलिस ने छात्रों की सुरक्षा के लिए 'स्कूल कनेक्ट' पहल की शुरुआत की

हिमाचल पुलिस ने छात्रों की सुरक्षा के लिए 'स्कूल कनेक्ट' पहल की शुरुआत की

हिमाचल प्रदेश पुलिस ने राज्य में छात्रों की सुरक्षा और स्कूलों में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से एक नई पहल 'स्कूल कनेक्ट - स्कूल सुरक्षा और छात्र संरक्षण पहल' की शुरुआत की है। यह कदम मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू के दृष्टिकोण और निर्देशों के अनुरूप उठाया गया है, जिसका लक्ष्य बच्चों की सुरक्षा, परिसर की सुरक्षा और पुलिस, शैक्षणिक संस्थानों तथा अभिभावकों के बीच समन्वय को बढ़ाना है।

इस महत्वपूर्ण पहल के तहत, पुलिस महानिदेशक अशोक तिवारी ने शिमला स्थित पुलिस मुख्यालय में 27 स्कूलों के प्रधानाचार्यों और प्रतिनिधियों के साथ एक संवादात्मक बैठक की अध्यक्षता की। इस कार्यक्रम का उद्देश्य 'पुलिस-विश्वविद्यालय कनेक्ट कार्यक्रम' की सफलता को आगे बढ़ाना है, जिसमें अब स्कूलों को भी शामिल किया गया है। इसका विशेष ध्यान निवारक पुलिसिंग और बच्चों को उभरते सुरक्षा खतरों से बचाने पर है।

बैठक में स्कूल सुरक्षा के कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। इनमें प्रवेश और निकास बिंदुओं पर सीसीटीवी निगरानी, आगंतुकों का सत्यापन, पहुंच नियंत्रण, कर्मचारियों का सत्यापन और नियमित सुरक्षा मूल्यांकन शामिल थे। पुलिस महानिदेशक ने इन उपायों को लागू करने की आवश्यकता पर जोर दिया ताकि स्कूलों में एक सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित किया जा सके।

इसके अतिरिक्त, बच्चों के अपहरण, यौन शोषण, धमकाने, उत्पीड़न और शोषण को रोकने पर विशेष बल दिया गया। पॉक्सो अधिनियम (POCSO Act) के बारे में अधिक जागरूकता और घटनाओं की समय पर रिपोर्टिंग के महत्व को भी रेखांकित किया गया। डिजिटल वातावरण में बढ़ती चुनौतियों को पहचानते हुए, स्कूलों को साइबरबुलिंग, ऑनलाइन ग्रूमिंग, सेक्सटॉर्शन, डीपफेक और अन्य साइबर खतरों के प्रति भी संवेदनशील बनाया गया।

'चिट्टा' (नशीले पदार्थ) और अन्य नशीली दवाओं से छात्रों की सुरक्षा की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला गया। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में चलाए जा रहे 'एंटी-चिट्टा जन आंदोलन' में सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया गया। यह पहल छात्रों को नशे से दूर रखने और उन्हें एक स्वस्थ जीवन शैली अपनाने के लिए प्रेरित करने में सहायक होगी।

अन्य प्रमुख क्षेत्रों में स्कूल परिवहन सुरक्षा, चालकों और सहायक कर्मचारियों का सत्यापन, आपदा तैयारी, निकासी अभ्यास और आपातकालीन प्रतिक्रिया सहायता प्रणाली (ERSS-112) के बारे में जागरूकता शामिल थी। डीजीपी अशोक तिवारी ने नामित पुलिस नोडल अधिकारियों, स्कूल सुरक्षा समितियों और स्कूलों तथा स्थानीय पुलिस के बीच नियमित बातचीत के महत्व पर जोर दिया, ताकि किसी भी आपात स्थिति में त्वरित और प्रभावी प्रतिक्रिया सुनिश्चित की जा सके।

ताज़ा खबरें

अधिक देखी जाने वाली खबरें