अलेड़ से नैनीखड्ड और एंग्लोट तक बेसहारा पशुओं की समस्या लगातार बनी हुई है। क्षेत्र में दो गोशालाएं होने के बावजूद बड़ी संख्या में गायें सड़कों पर भटक...
दो गोशालाएं, फिर भी सड़कों पर बेसहारा गोवंश
अलेड़ से नैनीखड्ड और एंग्लोट तक बेसहारा पशुओं की समस्या लगातार बनी हुई है। क्षेत्र में दो गोशालाएं होने के बावजूद बड़ी संख्या में गायें सड़कों पर भटक रही हैं। दिनभर सड़क किनारे घूमने के बाद कई पशु सड़क पर ही बैठ जाते हैं। इससे वाहन चालकों को आवाजाही में परेशानी हो रही है और हादसे का खतरा भी बना हुआ है। स्थानीय लोगों के अनुसार सड़क पर झुंड में बैठे पशुओं के कारण वाहन चालकों को अचानक दिशा बदलनी पड़ती है। कई बार तेज रफ्तार वाहनों के सामने पशु आ जाने से स्थिति और जोखिम भरी हो जाती है। रात के समय अंधेरे में सड़क पर बैठे पशु दिखाई न देने से खतरा बढ़ जाता है। बेसहारा पशु केवल यातायात के लिए ही परेशानी नहीं बन रहे, बल्कि किसानों की मेहनत पर भी असर डाल रहे हैं। स्थानीय निवासी किशोरी लाल, दर्शन और महाशु मिंटू ने बताया कि पशु खेतों में घुसकर खड़ी फसल को नुकसान पहुंचा रहे हैं। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने संबंधित विभाग और स्थानीय प्रशासन से मांग की है कि सड़कों पर घूम रहे बेसहारा पशुओं को गोशालाओं तक पहुंचाने के लिए प्रभावी व्यवस्था की जाए। उन्होंने कहा कि समस्या का स्थायी समाधान होने से किसानों की फसल बचने के साथ वाहन चालकों और राहगीरों की सुरक्षित आवाजाही भी सुनिश्चित हो सकेगी।