प्लास्टिक की बोतलों और खुले केनों में पेट्रोल-डीजल देने पर सख्ती बढऩे से हिमाचल के किसान और बागवान नई परेशानी में घिर गए हैं। सुरक्षा कारणों और पेट्रो...
कैन-बोतलों में पेट्रोल-डीजल बंद, किसानों-बागबानों की बढ़ी टेंशन
प्लास्टिक की बोतलों और खुले केनों में पेट्रोल-डीजल देने पर सख्ती बढऩे से हिमाचल के किसान और बागवान नई परेशानी में घिर गए हैं। सुरक्षा कारणों और पेट्रो पदार्थों के दुरुपयोग पर अंकुश लगाने के लिए लागू किए गए नियमों का सीधा असर अब खेतों और बागों तक पहुंचने लगा है। विशेषकर पावर टिलर से खेती करने वाले किसानों और डीजल स्प्रे पंप का इस्तेमाल करने वाले बागबानों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। किसानों की समस्या को देखते हुए जिला प्रशासन ने प्रदेश सरकार के माध्यम से पेट्रोलियम कंपनियों से इस मामले में व्यावहारिक समाधान और विशेष छूट देने का आग्रह किया है। प्रदेश सरकार कालाबाजारी और पेट्रो पदार्थों के दुरुपयोग को रोकने के लिए खुले में ईंधन की बिक्री को हतोत्साहित करती रही है, लेकिन पहाड़ी प्रदेश में इसकी वजह से कृषि और बागबानी कार्य प्रभावित होने लगे हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में छोटे खेत होने के कारण किसान ट्रैक्टर के बजाय पावर टिलर का अधिक उपयोग करते हैं। इन मशीनों के ईंधन टैंक छोटे होते हैं और इन्हें पेट्रोल पंप तक ले जाना आसान नहीं होता। खेतों में काम के दौरान तेल समाप्त होने पर किसान को काफी समय गंवाना पड़ता है, जिससे खेती का कार्य भी प्रभावित होता है।
इसी प्रकार बागवानों के लिए डीजल स्प्रे पंप को ईंधन भरवाने के लिए पेट्रोल पंप तक ले जाना व्यावहारिक नहीं है। ऐसे में अचानक ईंधन खत्म होने पर पूरे काम पर असर पड़ता है। पेट्रोलियम अधिनियम-1934 और पेट्रोलियम नियम-2002 के तहत खुले बर्तनों, प्लास्टिक की बोतलों और असुरक्षित केनों में पेट्रोल-डीजल देने पर पहले से ही रोक है। जून 2026 में केंद्र सरकार द्वारा जारी नए दिशा-निर्देशों के बाद इन नियमों को और कड़ा कर दिया गया है। पेट्रोल पंप केवल वाहनों की मुख्य ईंधन टंकी अथवा पेट्रोलियम एवं विस्फोटक सुरक्षा संगठन (पीईएसओ) से स्वीकृत विशेष धातु कंटेनरों में ही ईंधन दे सकते हैं। प्लास्टिक की बोतलों और कांच के बर्तनों को पीईएसओ की मंजूरी प्राप्त नहीं है। इनमें घर्षण से आग लगने का खतरा अधिक होने से प्रतिबंधित है। आवश्यक वस्तु अधिनियम-1955 के तहत कालाबाजारी और जमाखोरी रोकने के लिए भी सरकार ने मोटर स्पिरिट और हाई-स्पीड डीजल की खुदरा आपूर्ति संबंधी नियमों को सख्त किया है। उल्लंघन पर कानूनी कार्रवाई का भी प्रावधान है।
जिला खाद्य आपूर्ति नियंत्रक राजीव शर्मा ने बताया कि मामला प्रशासन के संज्ञान में है। किसानों और बागवानों को पेश आ रही कठिनाइयों को देखते हुए प्रशासन ने प्रदेश सरकार के माध्यम से यह विषय पेट्रोलियम कंपनियों के समक्ष उठाया है, ताकि कोई ऐसा समाधान निकाला जा सके जिससे सुरक्षा मानकों से समझौता किए बिना किसानों के हित भी सुरक्षित रह सकें।
गगरेट के प्रगतिशील किसान रजनीश रिंटू का कहना है कि कानूनी प्रावधान अपनी जगह हैं, लेकिन इनका सीधा असर किसानों और बागवानों पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार को निर्धारित एसओपी तैयार कर किसानों के लिए ईंधन उपलब्ध करवाने की व्यवस्था करनी चाहिए, अन्यथा प्रदेश के किसानों और बागवानों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा