चिट्टा तस्करों को सजा दिलवाने के लिए जिला प्रशासन ने किया महामंथन

शिमला। जिला प्रशासन शिमला द्वारा एनडीपीएस एक्ट 1985, एससी एसटी एक्ट 1989 और पॉक्सो एक्ट 2012 को लेकर एक दिवसीय विशेष कार्यशाला आज होटल होलीडे होम...

चिट्टा तस्करों को सजा दिलवाने के लिए जिला प्रशासन ने किया महामंथन

चिट्टा तस्करों को सजा दिलवाने के लिए जिला प्रशासन ने किया महामंथन

शिमला। जिला प्रशासन शिमला द्वारा एनडीपीएस एक्ट 1985, एससी एसटी एक्ट 1989 और पॉक्सो एक्ट 2012 को लेकर एक दिवसीय विशेष कार्यशाला आज होटल होलीडे होम में आयोजित की गई। पहली बार जिला में इस तरह की समावेशी कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस महामंथन में चिट्टा तस्करों को सजा दिलवाने के लिए विशेष रणनीति की विस्तृत चर्चा की गई।इस महामंथन में जिला के सभी एसडीएम, डीएसपी, जिला न्यायवादी, अभियोजन अधिकारी, सहायक न्यायवादी, स्वास्थ्य विभाग और जिला के सभी एसएचओ मौजूद रहे। प्रदेश सरकार ने हिमाचल प्रदेश को चिट्टा मुक्त बनाने का संकल्प लिया है। ऐसे में नशा तस्करों को सजा कम से कम समय दिलवाने की दिशा में प्रभावी तरीके से कार्य किया जा रहा है।

हमने स्वयं अपनी जॉब का चयन किया है। अगर फिर भी हम कर्तव्यों का ईमानदारी से निर्वहन नहीं कर रहे है तो फिर समाज को न्याय दिलवाने में हम काफी पीछे रह रहे है। हमारे मामले कोर्ट में जब पहुंचते है तो दोषसिद्धि हो ही नहीं पाती है। पीड़ित लोगों को न्याय मिल नहीं पाता है। ऐसे में लोगों का प्रशासन और न्याय के प्रति दृष्टिकोण काफी बदल जाता है। लेकिन जिस पीड़ित के साथ घटना घटी होती है अगर उसे न्याय मिल जाए तो उसके चेहरे पर जो मुस्कान आती है वो हमारे लिए प्रेरणादायक होती है। उन्होंने कहा कि जब मामलों में दोषमुक्ति दर अधिक होगी तो लोगों में डर होगा ही नहीं और वह अधिक से अधिक अपराध करने की दिशा में बढ़ते रहते है। ऐसे लोग बार-बार अपराध करते है। इसलिए लोगों को कानून का डर होना जरूरी है ताकि उनको ध्यान रहे कि गलत करेंगे तो सजा कोर्ट से मिलेगी।