ग्रामीणों ने छह घंटे रोकी अवैध कटान की जांच करने गई टीम

हिमगिरी क्षेत्र का मामला, अवैध कटान की शिकायत पर जांच करने गई थे कर्मचारी पहले अवैध कटान की शिकायत करने वाले को साथ लेकर आएं, तभी जंगल के अंदर जाने...

ग्रामीणों ने छह घंटे रोकी अवैध कटान की जांच करने गई टीम

ग्रामीणों ने छह घंटे रोकी अवैध कटान की जांच करने गई टीम

हिमगिरी क्षेत्र का मामला, अवैध कटान की शिकायत पर जांच करने गई थे कर्मचारी

पहले अवैध कटान की शिकायत करने वाले को साथ लेकर आएं, तभी जंगल के अंदर जाने दिया जाएगा।
यह बात हिमगिरी में इकट्ठा हुए ग्रामीणों ने वन विभाग की जांच टीम का रास्ता रोकने के दौरान कही। रविवार को जैसे ही विभाग की टीम वन परिक्षेत्र अधिकारी की अगुवाई में 11 बजे वहां पहुंची तो पंचायत के नवनिर्वाचित प्रधान सहित ग्रामीणों की भीड़ ने उन्हें रोक लिया। टीम ने उन्हें अपना कार्य करने के लिए काफी समझाया और रास्ता छोड़ने की बात कही लेकिन ग्रामीणों ने उन्हें गांव से आगे नहीं जाने दिया। ग्रामीणों का कहना था कि उनके क्षेत्र के जंगल में कोई भी अवैध कटान नहीं हुआ है, केवल उनके क्षेत्र को बदनाम करने की साजिश के तहत झूठी शिकायत की जा रही है। उन्होंने छह घंटे तक टीम को वहीं रोके रखा। सभी ग्रामीण एक ही मांग करते रहे कि पहले शिकायत करता को साथ लेकर आएं तभी उन्हें जंगल में जाने दिया जाएगा। जिस व्यक्ति ने अवैध कटान की शिकायत की है उसे ये भी पता होगा कि कौन सी जगह पर पेड़ काटे गए हैं। ऐसे में उसकी उपस्थिति जांच में होना जरूरी है। ऐसा नहीं करने पर कोई भी जांच नहीं करने दी जाएगी। विभाग की टीम ने इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी डीएफओ को दी। शाम को वो भी मौके पर पहुंच गए। उनके समझाने के बाद भी ग्रामीण मानने को तैयार नहीं हुए। अंत में टीम को ग्रामीणों के आगे झुकना ही पड़ा और वहां से वापिस लौटना पड़ा। ग्रामीणों ने भी विभाग को लिखित में आश्वस्त किया है कि जब भी वे क्षेत्र में जांच करने के लिए पहुंचेंगे पंचायत प्रतिनिधि उनके साथ रहेंगे।

कंधवारा प्रधान चंपो देवी, उपप्रधान रीता देवी, वार्ड सदस्य छवली, पूर्व बीडीसी सदस्य प्रेम लाल, समेत अन्य खिंदू, गोबिंद राम ने बताया कि जो व्यक्ति अवैध कटान की झूठी शिकायत कर रह रहा है, वो सामने नहीं आ रहा। इसलिए उन्होंने ग्रामीणों के साथ मिलकर फैसला लिया है कि जब तक शिकायतकर्ता नहीं आएगा तब तक कोई जांच नहीं होगी। जब वो आएगा तो पूरे गांव के लोग इस जांच में अपना सहयोग करने को तैयार हैं।

डीएफओ सुशील कुमार गुलेरिया ने बताया कि जांच टीम को 15 दिनों के भीतर अपनी जांच पूरी करने को कहा गया है। लेकिन, रविवार को गांव वासियों ने टीम को आगे नहीं जाने दिया। पंचायत प्रधान और ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया जा रहा है।